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आम खाने के फायदे और इसके औषधीय गुणों के बारे में पूरी जानकारी

गर्मी का मौसम आते ही लोगो को इंतजार रहता है। शायद ही कोई ऐसा होगा, जिसे गर्मियों में आम खाना पसंद नहीं होगा। फलों का राजा आम लगभग हर जगह प्रसिद्ध है। आम सिर्फ फलों का राजा नहीं है, बल्कि आम के गुण कई हैं। आम के फायदे जानने से पहले हम आम से जुड़ी कुछ रोचक बातें जान लेते हैं।

आम
आम
  • आम की लगभग 100 से भी ज्यादा किस्में पाई जाती हैं।
  • आम के साथ-साथ आम के पत्ते और छिलके भी फायदेमंद होते हैं। आम के पत्तों को न सिर्फ पूजा में और घर के द्वार में लगाने के लिए उपयोग किया जाता है, बल्कि कई प्रकार की दवाइयां बनाने में भी इसका उपयोग किया जाता है।
  • दिल्ली में ‘अंतरराष्ट्रीय मैंगो फेस्टिवल’ (International Mango Festival) का आयोजन होता है, जिसमें आम की कई किस्मों की प्रदर्शनी लगती है और आम खाने की कई तरह की प्रतियोगिताएं भी होती हैं।
  • आम का वैज्ञानिक नाम मेंगीफेरा इंडिका है और संस्कृत में आम को आम्रः कहते हैं।
  • कच्चे आम में अगर नमक-मिर्च लगाकर खाया जाए, तो इसका स्वाद और बढ़ जाता है।
  • आम में बहुत सारे एंटीऑक्सीडेंट [Antioxidant] तत्व भी पाए जाते हैं, जो हमें बहुत फायदा पहुंचाते हैं

आम खाने के क्या फायदे हैं?

  1.  पका आम बहुत ही पौष्टिक होता है | इसमें प्रोटीन,विटामिन व खनिज पदार्थ, कार्बोहाइड्रेट तथा शर्करा विपुल मात्रा में होते हैं।
  2.  आम खाने से कैंसर से बचाव होता हैं, कैंसर के रोगियों के लिए आम बहुत लाभदायक हैं।
  3.  आँखों की रोशनी तेज करता है।
  4.  इसके नियमित सेवन से रोगप्रतिकारक शक्ति बढ़ती है।
  5.  मोटापा कम करने में मदद करता है।
  6.  खून की कमी को दूर करता है।
  7.  कोलेस्ट्रॉल को संतुलित रखता है।
  8.  सेक्स लाइफ को सफल बनाता हैं।
  9.  आम में एंटी-अल्सर गुण मौजूद हैं, जिससे अल्सर की समस्या से राहत मिलती हैं।

आम का उपयोग बीमारी में कैसे करे ?

  • खांसी रोग के लिए : आम की गुठली की गिरी को कुट पीसकर मधू के साथ चाटकर खाने से श्वांस और खांसी रोग में बहुत फायदे होते है।
  • ज्यादा पसीना आने पर : आम की गिरी को भूनकर पीसकर शरीर पर मलने के कुछ देर बाद नाहने से अधिक पसीना आने की विकृति दूर होती है।
  • कान का दर्द ख़त्म करने के लिए : आम की बोर को अंरडी के तेल में पकायें, जब बोर जल जाये तो उस तेल को छांनकर रखें। इस तेल को बून्द-बून्द कान में डालने से कान का दर्द ख़त्म होता हैं ।
  • गले की आवाज ठीक करने के लिए : आम के पत्तों को पानी में उबालकर काढ़ा बनायें, इस काढ़े को छानकर मधु मिलाकर हल्का गर्म-गर्म पीने से स्वर भेद, गला खराब की विकृति नष्ट होती है|
  • जले हुए अंग में आराम पहुंचाने के लिये : आम के पत्तों को सुखने पर उन्हें मिटटी के पात्र में रखकर आग पर तेज गर्म करके भस्म बना लें उस भस्म को पीसकर जले हुए अंग पर रखकर भुरखने से बहुत लाभ होता है। आम की गुठली की गिरी को जल के साथ पीसकर आग से जले भाग पर लेप करने से जलन व पीढा नष्ट होती है।
  • दाद और उष्णता के लिए: आम के बोर को थोडा सा कुटकर शरीर के विभिन्न भागों में मलने से दाद, उष्णता नष्ट होती है।
  • सफ़ेद बालों को काला करने के लिए : आम की गुठली की गिरी का तेल निकालकर सिर में लगाने से बालों के सफेद होने की विकृति नष्ट होती है। बाल तेजी से काले होने लगते हैं।
  • पीनस रोग के लिए : आम के बोर का रस निकालर बून्द-बून्द नाक में टपकाने से पिनस रोग से आराम मिलता हैं।
  • हिचकी दूर करने के लिए : आम के पत्तों को कुटकर चीलम में रखकर उसका धूंआ पीने से हिचकी रोग से आराम मिलता हैं।
  • अर्श रोग दूर करने के लिए: आम के पत्तों का रस और जामुन के पत्तों का रस 5-5 ग्राम मात्रा में लेकर उसमें दूध और शकर मिलाकर पीने से अर्ष रोग में बहुत लाभ होता है।
  • रक्त तिसार के रोग दूर करने के लिए : आम और जामुन की छाल बराबर मात्रा में लेकर पीसकर बराबर मात्रा में रखें, दस से पंद्रह ग्राम मात्रा में चूर्ण को रात को पानी में डालकर रखें सुबह मधु मिलाकर इस शीतकषाय को छांनकर पीने से रक्त तिसार की वृति नष्ट होती है।
  • पाचन शक्ति बढ़ाने के लिये : आम चुसकर खाने या आम को काटकर थोडा सेंधा नमक मिलाकर खाने से पाचन शक्ति जल्दी बढती है। आम और जामून के पत्तों को कषाय मिलाकर उसमें मधु मिलाकर सेवन करने से वमन और तृष्णा की विकृति नष्ट होती है।
  • दस्त के साथ खून आने पर : आम के पत्तों को कुटकर रस निकालकर, आम के पत्तों के 20 ग्राम रस में मधु 10 ग्राम और घी 5 ग्राम दूध में मिलाकर खाने से अतिसार दस्तों में खून निकलने की विकृति नष्ट होती है। घी और मधू कभी समान मात्रा में नहीं लेना चाहिए। इसके आलावा आम की गिरी को कुट पीसकर चूर्ण बनाकर 7-8 ग्राम मात्रा तक मठे के साथ सेवन करने से रक्त तिसार खुनी दस्तों में बहुत लाभ होता है। गिरी के इस चूर्ण को चावलों के दोहन के साथ खाने से भी लाभ होता है।
  • प्रदर रोग में रक्तस्राव होने पर : आम की गुठली के भीतर की गिरी का चूर्ण बनाकर मधु मिलाकर कुछ दिनों तक खाने से अर्श व स्त्रीयों के प्रदर रोग में रक्त स्त्राव की विकृती नष्ट हो जाती है।
  • बिच्छु के काटने पर: आम के बोर, फुलों को हाथों से मसलकर वृश्चिक बिच्छू के डंक मारने की जगह पर लगाने से विष का प्रभाव कम होता है। इससे तेज दर्द भी शांत होता है।

आम खाने के नुकसान

  • अधिक मात्रा में आम खाने से अतिसार हो सकता है।
  • आम खाने के बाद दहीं की लस्सी या घीं या तेल से बने व्यंजनों का सेवन करने से हानि पहूंचने की संभावना रहती है।
  • खट्टे आम खाकर दूध पीने से हानि होती है।
  • उष्ण प्रकृति वाले स्त्री-पुरूषों को आम खाने से हानि होती है। ऐसी स्त्री-पुरूषों को आम खाने से अर्ष व प्रवाहिका पेचीष हो सकती है।
  • ज्यादा आम खा लेने पर मंदागनी विषम ज्वर आदि विकार होने पर दूध पी लेने से लाभ होता है।
  • कल्मी आम भारी होने के कारण कुछ व्यक्तियों को आध्यमान, अफारा की उत्पत्ति कर देता है।
  • कच्चे आम का अधिक मात्रा में सेवन करने से रक्त विकार, नेत्र रोग, मंदागनी और स्वप्न दोष की विकृति होती है

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