प्रजापति समाज

राष्ट्रीय प्रजापति समाज एकता संघ

Daksh Prajapati kon the

दक्ष प्रजापति ब्रह्मा जी के मानस पुत्र थे और भगवान शंकर की पत्नी सती के पिता थे । दक्ष प्रजापति का विवाह स्वायंभूव की तृतीय पुत्री प्रसूति के साथ हुआ था। भगवान के आदेश पर दक्ष प्रजापति ने सृष्टि की वृद्धि के लिए 10000  तेजस्वी पुत्र पैदा किए । जन्म के साथ ही सभी पुत्र ज्ञान से युक्त थे। दक्ष ने उन्हें कहा कि भगवान का आदेश है कि हमें सृष्टि की वृद्धि करना है इसलिए तुम सारे संसार में फैल  जाओ और उत्तम संतान पैदा करो। पिता की आज्ञा लेकर वह अपने कार्य संपन्न करने निकल पड़े परंतु देव ऋषि नारद  ने उन्हें अपने कार्यों से विमुख करके पृथ्वी भ्रमण के  लिए भेज दिए।  

जब यह बात राजा दक्ष को पता चली तो उन्होंने नारद को श्राप दे दिया कि तुम कभी एक जगह रह नहीं पाओगे इसी कारण नारद जी का घर नही बसा और वह एक जगह से दूसरी जगह भटकते रहते हैं।  

ब्रह्मा जी ने राजा दक्ष को शांत कराया और फिर से संतान उत्पन्न करने के लिए कहा। इस बार राजा के यहा 60 पुत्रियां  उत्पन्न हुई।

दक्ष ने अपनी पुत्रियों का विवाह महर्षि कश्यप, चंद्रमा,भृगु और अरिष्टनेमी के साथ किया। इनके गर्भ से देवता, असुर, यक्ष- गंधर्व, पशु-पक्षी, वनस्पति और किट आदि उत्पन्न हुए और सृष्टि जीवो से भर गई

 सती का आत्मदाह

 एक बार राजा दक्ष ने कनखल में यज्ञ आयोजित किया और इसी यज्ञ में अपने जमाता भगवान शंकर और अपनी पुत्री सती को निमंत्रित नहीं किया । शिवजी के समझाने के बाद भी सती अपने पिता के यज्ञ में चली गई । यहा दक्ष ने सती और  शिवजी का घोर अपमान किया। अपना और शिव जी का अपमान न सह पाने के कारण सती ने यज्ञ में अपने शरीर की आहुति दे दी।

सती की मृत्यु का समाचार पाकर शिव जी ने वीरभद्र  को उत्पन्न किया। वीरभद्र ने यज्ञ का विध्वंस कर दीया और राजा दक्ष का सिर काट दिया। बाद में ब्रह्मा जी के आग्रह पर बकरे का सिर लगा दिया और यज्ञ को पूर्ण किया।

One thought on “दक्ष प्रजापति कौन थे”

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